60 लाख लोगों का बैंक अकाउंट होगा बंद? अभिषेक बनर्जी के दावे पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का करारा प्रहार!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के बीच जंग तेज हो गई है। कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मौजूदगी के बीच, अभिषेक बनर्जी ने धर्मतला के धरना मंच से एक ऐसा दावा किया जिसने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। अभिषेक का आरोप है कि ‘SIR’ प्रक्रिया के जरिए जिन 60 लाख वोटरों के नाम हटाने की साजिश हो रही है, केंद्र सरकार उन सभी के बैंक अकाउंट भी फ्रीज (स्थगित) करने की योजना बना रही है।

अभिषेक बनर्जी के इस सनसनीखेज बयान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दिल्ली लौटने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा, “कोई भी राजनीतिक नेता अगर मतदाताओं को डराने या उनमें भय पैदा करने की कोशिश करेगा, तो आयोग इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।” उन्होंने साफ किया कि मतदाता सूची में सुधार की पूरी प्रक्रिया संविधान के दायरे में हो रही है और किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

धर्मतला में ममता बनर्जी के साथ मंच साझा करते हुए अभिषेक ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार मिलकर बंगाल के लोगों के अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, ज्ञानेश कुमार ने राजनीतिक बयानों पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव के दौरान किसी भी दल के समर्थकों ने मतदाताओं पर दबाव बनाया या उन्हें धमकाया, तो आयोग उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा।

दो दिवसीय बंगाल दौरे के बाद चुनाव आयोग की फुल बेंच दिल्ली वापस लौट गई है। जाते-जाते ज्ञानेश कुमार ने यह भरोसा दिलाया कि SIR प्रक्रिया की शिकायतों की जांच की जाएगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ आयोग का रुख बेहद कड़ा रहेगा। अभिषेक के ‘बैंक अकाउंट फ्रीज’ वाले दावे और आयोग की ‘कठोर चेतावनी’ ने बंगाल के चुनावी माहौल को और भी अधिक गरमा दिया है।

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