सांतरागाछी-खड़गपुर और सैंथिया-पाकुर रेल रूट का होगा कायाकल्प; माल ढुलाई में आएगी तेजी, घटेंगे दाम!

पश्चिम बंगाल और झारखंड के रेल यात्रियों और उद्योग जगत के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दो महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। लगभग ४,४७४ करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली ये परियोजनाएं न केवल माल ढुलाई को सुगम बनाएंगी, बल्कि यात्रियों के सफर को भी तेज और सुरक्षित बनाएंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस ऐतिहासिक कदम की जानकारी दी है।

औद्योगिक विकास को मिलेगी नई ऊंचाई: ये रेल परियोजनाएं केंद्र सरकार की ‘पीएम गति शक्ति’ मास्टर प्लान का एक अहम हिस्सा हैं। इनका मुख्य उद्देश्य कोयला, सीमेंट और लोहे जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के परिवहन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है। विशेष रूप से आसनसोल और सीतारामपुर रेल कॉरिडोर, जो पूर्वी भारत के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, वहां रेल लाइनों पर दबाव काफी कम हो जाएगा। झारखंड के खनिज समृद्ध क्षेत्रों से पश्चिम बंगाल के उद्योगों तक कच्चा माल अब बिना किसी देरी के पहुंच सकेगा।

नेटवर्क का विस्तार और नई लाइनें: परियोजना के विवरण के अनुसार, सांतरागाछी-खड़गपुर सेक्शन में चौथी रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, सैंथिया-पाकुर सेक्शन में भी चौथी लाइन बिछाई जाएगी। इससे कुल १९२ किलोमीटर का नया रेल मार्ग भारतीय रेलवे के मानचित्र में शामिल होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और झारखंड के ५ जिलों के अंतर्गत आने वाले ५,६५२ गांवों के निवासी इस विकास कार्य से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।

रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा: रेलवे के इस विस्तार से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य के दौरान और प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी रखरखाव और संचालन में हजारों लोगों को काम मिलेगा। इसके अलावा, लाइनों की क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी, जिससे शांतिनिकेतन और तारापीठ जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इससे सड़कों पर ट्रकों का दबाव कम होगा और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बुनियादी ढांचे के विकास से अगले कुछ वर्षों में बंगाल और झारखंड की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

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