‘सीने पर चे ग्वेरा, हाथ में कमल!’ सिलीगुड़ी में गौतम देब ने शंकर घोष की राजनीतिक नैतिकता पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ की आहट के साथ ही सिलीगुड़ी की राजनीति गरमा गई है। सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब और भाजपा विधायक शंकर घोष के बीच छिड़ा ‘शब्द युद्ध’ अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच गया है। मंगलवार को भाजपा की ‘परिवर्तन रथ यात्रा’ के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की राजनीतिक निष्ठा और नैतिकता पर जमकर प्रहार किए।
गौतम देब का तीखा हमला: सिलीगुड़ी के मेयर और तृणमूल के संभावित उम्मीदवार गौतम देब ने शंकर घोष के वामपंथी अतीत को लेकर उन पर तंज कसा। देब ने सवाल किया, “एक समय जो लाठी लेकर उग्र वामपंथी आंदोलन करते थे और अपने सीने पर चे ग्वेरा का टैटू बनवाकर घूमते थे, वे अचानक भगवा चोला पहनकर ‘लाल कमल’ कैसे हो गए?” मेयर ने आगे कहा कि ५ साल तक मेयर परिषद के सदस्य और विधायक रहने के बावजूद पिछले चुनाव में शंकर घोष अपने ही वार्ड में क्यों पिछड़ गए, इसका जवाब उन्हें जनता को देना चाहिए।
शंकर घोष का पलटवार: गौतम देब के हमलों का जवाब देते हुए भाजपा विधायक शंकर घोष ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मेरी नैतिकता का फैसला जनता करेगी, गौतम देब नहीं। मैं जनता के बीच रहता हूं और उन्हीं के प्रति जवाबदेह हूं।” इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि धरना मंच से उन्होंने सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ टिप्पणी की है। घोष ने मांग की कि मुख्यमंत्री को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा वे सड़कों पर बड़ा आंदोलन करेंगे।
सियासी माहौल और सुरक्षा: सिलीगुड़ी के सेवक रोड स्थित खाटू श्याम मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद भाजपा की रथ यात्रा शुरू हुई, जिसमें विधायक शिखा चटर्जी और दीपक बर्मन सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए। यह यात्रा हिलकार्ट रोड और जंक्शन होते हुए नक्सलबाड़ी और खरीबाड़ी तक पहुंची। चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी ने साफ कर दिया है कि सिलीगुड़ी की जंग इस बार काफी दिलचस्प होने वाली है। पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती के बीच दोनों दल एक-दूसरे को मात देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।