सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की बड़ी जीत! SIR निर्देश के बाद अब अभिषेक बनर्जी के निशाने पर ‘फॉर्म ६

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची और मतदान के अधिकारों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद तृणमूल कांग्रेस के खेमे में भारी उत्साह है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संघर्षों और पार्टी के निरंतर आंदोलन की बड़ी जीत बताया है। मंगलवार को धरना मंच से समर्थकों को संबोधित करते हुए अभिषेक ने कहा कि अदालत ने न केवल चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बंगाल के मामले को एक ‘विशेष मामला’ मानते हुए ट्रिब्यूनल गठित करने का भी निर्देश दिया है।

अभिषेक की मुख्य बातें और कोर्ट का रुख: अभिषेक बनर्जी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि मतदान से महज एक दिन पहले तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अवसर उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा, “यह उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो जबरन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश कर रहे थे। हमारे वकीलों ने कोर्ट में तथ्यों के साथ बात रखी और जीत हासिल की।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि अब टीएमसी की अगली नजर ‘फॉर्म ६’ (नए मतदाता पंजीकरण) की प्रक्रिया पर होगी ताकि किसी भी पात्र नागरिक का अधिकार न छीना जाए।

चुनाव आयोग पर तीखा हमला: अभिषेक ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब पत्रकारों ने उनसे कड़े सवाल पूछे, तो उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। अभिषेक के अनुसार, आयोग कुछ खास लोगों के इशारे पर बंगाल की जनता के अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रहा था, जिसे शीर्ष अदालत ने नाकाम कर दिया है। उन्होंने कहा, “हम सड़क पर भी लड़ रहे हैं, संसद में भी आवाज उठा रहे हैं और अब कानूनी तौर पर भी हमने अपनी ताकत साबित कर दी है।”

जनता के लिए भावुक अपील: अभिषेक ने बंगाल की जनता से अपील की कि वे मतदाता सूची की गड़बड़ियों या नाम कटने के डर से निराश होकर आत्महत्या जैसा कदम न उठाएं। उन्होंने आश्वासन दिया, “मजबूत रहें, हम आपके साथ हैं। अब आपके पास ट्रिब्यूनल जाने का मौका होगा। टीएमसी का हर कार्यकर्ता आपके अधिकारों की रक्षा के लिए आपके पीछे खड़ा है।” विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश ने चुनाव से पहले टीएमसी को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा और मनोवैज्ञानिक बढ़त दे दी है।

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