ममता बनर्जी की बड़ी जीत! सुप्रीम कोर्ट के ट्रिब्यूनल गठन के आदेश के बाद धरना खत्म, कहा- ‘यह जनता की जीत है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर पिछले ५ दिनों से चल रहा अपना धरना मंगलवार को समाप्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदाता सूची (SIR Case) में गड़बड़ियों की जांच के लिए एक विशेष ट्रिब्यूनल गठित करने के निर्देश के बाद ममता ने इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उनकी लड़ाई उन लाखों लोगों के लिए थी जिनका नाम राजनीतिक साजिश के तहत वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था या ‘विचाराधीन’ रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अदालत ने निर्देश दिया है कि कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा। इस ट्रिब्यूनल में दूसरे राज्यों के जज भी शामिल हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदान से ठीक एक दिन पहले भी लिस्ट में शामिल होता है, तो उसे अगले दिन वोट डालने का अधिकार होगा। साथ ही, चुनाव आयोग को यह बताना होगा कि किसी व्यक्ति का नाम सूची से क्यों हटाया गया।
ममत्ता का चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमला: धरना खत्म करने से पहले ममता बनर्जी ने कड़े लहजे में कहा, “बीजेपी के इशारे पर लाखों लोगों के नाम ‘कन्सिडरेशन’ (विचाराधीन) लिस्ट में डाल दिए गए थे। चुनाव आयोग ने बार-बार ऐप बदलकर लोगों को गुमराह किया, जिसके लिए आज कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई है।” उन्होंने आश्वासन दिया कि भले ही १५ या १६ मार्च को चुनाव की तारीखों का ऐलान हो जाए, लेकिन अब ट्रिब्यूनल के रूप में जनता के पास एक मजबूत कानूनी रास्ता है।
जनता को भरोसा और भविष्य की रणनीति: ममता बनर्जी ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे कैंप लगाकर आम लोगों की मदद करें ताकि हर पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हो सके। उन्होंने कहा, “अब खेल सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है। हमें सतर्क रहना होगा।” मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे डरें नहीं और अपने अधिकारों के लिए लड़ें। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप ने चुनाव से पहले ममता बनर्जी को एक बड़ी राजनीतिक बढ़त दे दी है।