वोटिंग से एक दिन पहले तक अधिकार सुरक्षित! सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ममता ने खत्म किया धरना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को घोषणा की कि भले ही १५-१६ मार्च को विधानसभा चुनावों की घोषणा हो जाए, लेकिन मतदाताओं के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदाता सूची (SIR) मामले में विशेष ट्रिब्यूनल बनाने के निर्देश के बाद ममता ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया और कोलकाता के मेट्रो चैनल पर चल रहा अपना धरना समाप्त कर दिया।
बीजेपी पर तीखा प्रहार: ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “बीजेपी के कहने पर चुनाव आयोग ने ६० लाख लोगों के नाम ‘कन्सिडरेशन’ लिस्ट में डाल दिए। बीजेपी को खुश करने के लिए रोज ऐप और मैसेज बदले जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी नेता होटलों में रुककर पैसे बांट रहे हैं, और केंद्र सरकार के १०-१२ साल के कार्यकाल पर एक ‘चार्जशीट’ तैयार होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और राहत: अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम मतदान से ठीक एक दिन पहले भी सूची में जुड़ता है, तो वह वोट डाल सकेगा। ममता ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने बंद दरवाजे खोल दिए हैं। अब हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित ट्रिब्यूनल में जाकर वे सभी लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं जिनके नाम हटाए गए हैं।”