पहाड़ में ‘SIR’ पर संग्राम: वोटर लिस्ट से गोरखाओं के नाम कटने पर भड़के अनीत थापा, दी आंदोलन की चेतावनी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में सियासी पारा चढ़ गया है। ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के बाद आई वोटर लिस्ट ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में हजारों वास्तविक गोरखा मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। इसी मुद्दे पर जीटीए (GTA) के मुख्य कार्यकारी और बीजीपीएम अध्यक्ष अनीत थापा ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
बीजेपी पर साधा निशाना बुधवार को कलिम्पोंग में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अनीत थापा ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “बीजेपी नेताओं ने दावा किया था कि SIR के जरिए घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के नाम हटाए जाएंगे, लेकिन हकीकत में पहाड़ के मूल निवासियों यानी गोरखाओं को निशाना बनाया गया है।” थापा ने आरोप लगाया कि प्रशासन को गोरखा संस्कृति और उपनामों (Surnames) की समझ नहीं है, जिसके कारण पिता और पुत्र के अलग उपनाम होने पर नाम काट दिए गए। उन्होंने एआई (AI) के गलत इस्तेमाल को भी इसका जिम्मेदार ठहराया।
हजारों मतदाताओं का भविष्य अधर में आंकड़ों के अनुसार, दार्जिलिंग और कर्सियांग में लगभग 47,976 और कलिम्पोंग में 18,931 मतदाताओं के नाम या तो हटा दिए गए हैं या विचाराधीन हैं। अनीत थापा ने चेतावनी दी कि कई रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम कटने से उनकी पेंशन रुक सकती है, जिसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। दूसरी ओर, बीजेपी सांसद राजू बिस्ता ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ब्लॉक स्तर पर विशेष टीमें बनाने की मांग की है ताकि वास्तविक मतदाताओं के नाम वापस जोड़े जा सकें। फिलहाल, वोटर लिस्ट के इस मुद्दे ने पूरे पहाड़ को आंदोलित कर दिया है।