सिलीगुड़ी में एलपीजी का महा-संकट: होटलों में खाना मिलना हुआ मुश्किल, उत्तर बंगाल के पर्यटन पर मंडराए काले बादल!

उत्तर बंगाल के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र सिलीगुड़ी में इन दिनों रसोई गैस (LPG) को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव का असर अब सिलीगुड़ी की रसोई और यहाँ के लजीज व्यंजनों पर साफ दिखने लगा है। शहर के होटल, रेस्तरां और फास्ट फूड व्यवसाय इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। गैस की भारी किल्लत के कारण कई छोटे-बड़े होटलों ने अपने मेनू कार्ड से मांसाहारी व्यंजन और भारी पकवानों को हटा दिया है।
व्यवसायियों की टूटी कमर सिलीगुड़ी के होटल व्यवसायी बाप्पा सरकार ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि गैस की आपूर्ति न होने और कीमतों में अचानक हुई भारी वृद्धि ने व्यापार को ठप कर दिया है। उन्होंने बताया, “अब हम ग्राहकों को केवल दाल-चावल और साधारण सब्जियां ही परोस पा रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो हमें अगले कुछ दिनों में होटल बंद करने पड़ेंगे।” वहीं, सड़क किनारे फास्ट फूड की दुकान चलाने वाली सविता घोष का कहना है कि गैस न मिलने से न केवल दुकान का चूल्हा ठंडा पड़ रहा है, बल्कि घर का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है।
पर्यटकों के लिए बढ़ा तनाव उत्तर बंगाल की खूबसूरती देखने आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। सिलीगुड़ी से होकर ही दार्जिलिंग, सिक्किम और डुआर्स जाने वाले सैलानी यहाँ के भोजन पर निर्भर रहते हैं। लेकिन गैस की कमी के कारण अब पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस बीच, बाजार में गैस की किल्लत का फायदा उठाकर इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में भारी उछाल आया है, वहीं कई पुराने रेस्तरां मजबूरन कोयले और लकड़ी के चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं।
सरकार की सख्ती और नियमों का बोझ सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए ’25 दिनों के अंतराल’ वाले नियम ने आग में घी डालने का काम किया है। व्यावसायिक सिलेंडर के दाम आसमान छू रहे हैं और घरेलू गैस की कीमत में भी 60 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। नबन्ना (राज्य सचिवालय) ने इस स्थिति को देखते हुए तेल कंपनियों के साथ आपातकालीन बैठक बुलाई है और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने पुलिस को भी सतर्क रहने को कहा है ताकि संकट के इस समय में कोई नाजायज फायदा न उठा सके। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ और आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो सिलीगुड़ी का खाद्य उद्योग पूरी तरह चरमरा सकता है।