5 महीने से नहीं हुई कोई सुनवाई! आरजी कर कांड के भविष्य पर हाईकोर्ट में लगा ग्रहण

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की उम्मीद एक बार फिर कानूनी पेच में फंसती नजर आ रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस देबांशु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह तीसरी बार है जब किसी जज ने इस संवेदनशील मामले से हटने का फैसला किया है, जिससे न्याय मिलने की प्रक्रिया और लंबी होती दिख रही है।

जस्टिस देबांशु बसाक ने मंगलवार को टिप्पणी की कि उनकी बेंच क्रिमिनल अपील मामलों की नियमित बेंच नहीं है और इस मामले के लिए प्रतिदिन सुनवाई की आवश्यकता है, जो उनके लिए संभव नहीं है। अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार के वकील जयंत नारायण चटर्जी ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि जांच एजेंसी केवल समय बिता रही है। पीड़ित परिवार ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले की त्वरित सुनवाई की गुहार लगाई थी, लेकिन जजों के पीछे हटने से मामला फिर अटक गया है।

गौरतलब है कि ९ अगस्त २०२४ को हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। निचली अदालत ने संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई है, लेकिन सीबीआई ने फांसी की सजा की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, परिवार का मानना है कि इस अपराध के पीछे कोई बड़ी साजिश है जिसकी जांच होनी चाहिए। पिछले ५ महीनों से हाईकोर्ट में एक भी प्रभावी सुनवाई नहीं हुई है। अब यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल के पास जाएगा, जो तय करेंगे कि कौन सी नई बेंच इस मामले को आगे बढ़ाएगी।

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