राष्ट्रपति का अपमान! ममता बनर्जी से माफी की मांग, आदिवासियों ने दी टीएमसी को उखाड़ फेंकने की धमकी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अपमान का आरोप लगाते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आदिवासी और अनुसूचित जाति-जनजाति समाज ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को आसनसोल के कुल्टी विधानसभा अंतर्गत नियामतपुर में जीटी रोड जाम कर आदिवासियों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे तृणमूल कांग्रेस को राज्य से ‘उखाड़ फेंकेंगे’।
विवाद की शुरुआत राष्ट्रपति के हालिया उत्तर बंगाल दौरे से हुई। ७ मार्च को अंतरराष्ट्रीय संताल काउंसिल के सम्मेलन में राष्ट्रपति शामिल हुई थीं, लेकिन वहां न तो मुख्यमंत्री मौजूद थीं और न ही राज्य का कोई प्रतिनिधि। राष्ट्रपति ने खुद इस पर दुख जताते हुए कहा था, “मैं ममता को अपनी बहन मानती हूं, पता नहीं वे मुझसे क्यों नाराज हैं।” इसके अलावा सुरक्षा में लापरवाही को लेकर केंद्र ने राज्य से जवाब मांगा है। इसके जवाब में ममता बनर्जी ने धरने के मंच से राष्ट्रपति के बार-बार बंगाल दौरे और उनके बयानों पर राजनीतिक सवाल खड़े किए, जिससे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है।
आदिवासी नेता सत्यजीत दास ने कहा, “राष्ट्रपति का अपमान पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। अगर मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगती हैं, तो इस बार उन्हें आदिवासियों की ताकत का अहसास होगा।” प्रदर्शन के कारण घंटों तक यातायात बाधित रहा। चुनाव से ठीक पहले आदिवासियों की यह नाराजगी ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनावी चुनौती साबित हो सकती है।