सावधान! भारत में १३.८ करोड़ लोग किडनी की बीमारी की चपेट में, जानें क्या हैं शुरुआती लक्षण!

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान हमारे शरीर के फिल्टर यानी किडनी को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) दुनिया भर में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन चुका है। भारत के लिए स्थिति और भी चिंताजनक है, जहाँ १३.८ करोड़ लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा है।

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम कालरा के अनुसार, किडनी की बीमारी एक ‘साइलेंट किलर’ है क्योंकि शुरुआत में इसके कोई ठोस लक्षण दिखाई नहीं देते। अक्सर जब तक पैरों में सूजन, थकान या पेशाब में कमी जैसे लक्षण सामने आते हैं, तब तक किडनी काफी हद तक खराब हो चुकी होती है। बिना डॉक्टरी सलाह के पेनकिलर (जैसे इबुप्रोफेन) लेना, कम पानी पीना या बहुत अधिक पानी पीना और अनियंत्रित डायबिटीज इस बीमारी के मुख्य कारण हैं। डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम और साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) कराकर इस गंभीर खतरे से बचा जा सकता है।

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