क्या सचिन तेंदुलकर को जबरन रिटायरमेंट के लिए मजबूर किया गया था? पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल के खुलासे ने मचाया हड़कंप!

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने साल 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा था, लेकिन एक ताजा खुलासे ने क्रिकेट गलियारों में सनसनी फैला दी है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने दावा किया है कि बोर्ड ने साल 2012 में ही सचिन का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया था। यानी बोर्ड अब और ज्यादा सचिन को मैदान पर नहीं देखना चाहता था।

साल 2012 सचिन के करियर का सबसे कठिन दौर था। आंकड़ों के मुताबिक, उस साल खेले गए 9 टेस्ट मैचों में उनका औसत मात्र 23.80 था और उनके बल्ले से एक भी शतक नहीं निकला था। वनडे क्रिकेट में भी 10 मैचों में उनका औसत 31.50 ही रहा। पाटिल ने बताया कि उन्होंने सचिन से सीधे तौर पर पूछा था कि उनकी भविष्य की क्या योजनाएं हैं? जब सचिन ने हैरानी जताते हुए कारण पूछा, तो पाटिल ने साफ कह दिया था कि चयनकर्ता अब नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

पाटिल ने साक्षात्कार में स्पष्ट किया, “चयनकर्ताओं के पास किसी खिलाड़ी को संन्यास लेने के लिए मजबूर करने की शक्ति नहीं होती। हम केवल उन्हें टीम से बाहर कर सकते हैं। हमने सचिन से उनकी योजना पूछी और उन्होंने कहा कि वह खेलना जारी रखना चाहते हैं। हमने उनकी इच्छा का सम्मान किया।” हालांकि, उस दौरान टीम में बड़े बदलाव हो रहे थे। मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, अश्विन, जडेजा और रहाणे जैसे खिलाड़ी टीम में जगह बना रहे थे। पाटिल का कहना है कि लोग अक्सर सिर्फ यह याद रखते हैं कि हमने सचिन को हटाने की बात की थी, लेकिन वे उस समय के बदलाव की जरूरत को भूल जाते हैं। अंततः सचिन ने 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना विदाई मैच खेला, लेकिन पाटिल के इस दावे ने पुरानी यादों और विवादों को फिर से ताजा कर दिया है।

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