धान-गेहूं का ‘मोह’ छोड़ें! दालों की खेती पर जोर देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को बड़ा निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने देश की कृषि प्रणाली में एक बड़े बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि वह किसानों को पारंपरिक धान और गेहूं की खेती के चक्र से बाहर निकालकर वैकल्पिक फसलों, विशेष रूप से दालों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करे। शुक्रवार को किसान महापंचायत की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, “हमें यह देखने की जरूरत है कि वास्तव में कितने धान और गेहूं की आवश्यकता है। अब गेहूं ही अंतिम सत्य नहीं है।”
अदालत का मानना है कि उत्तर और मध्य भारत में धान-गेहूं के विकल्प के रूप में दालों की खेती को बढ़ावा देना अनिवार्य है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे किसानों को दालों की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और समय पर खरीद की गारंटी देनी होगी।
सुनवाई के दौरान विदेश से ‘पीली मटर’ के शुल्क मुक्त आयात का मुद्दा भी उठा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 2026 तक शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने से घरेलू बाजार में दालों की कीमतें गिर गई हैं, जिससे भारतीय किसान घाटे में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को आयातित दालों की कीमतों को नियंत्रित करने का निर्देश दिया ताकि स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा हो सके। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को इस संबंध में सभी पक्षों के साथ बैठक कर नई नीति तैयार करने का निर्देश दिया है।