भारतीय रेलवे से खत्म होगा वेटिंग लिस्ट का झंझट! 1000 करोड़ के प्रोजेक्ट से बदलेगा टिकट सिस्टम

भारतीय रेलवे अपनी 40 साल पुरानी टिकट बुकिंग व्यवस्था को अलविदा कहने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने 1000 करोड़ रुपये की लागत से एक नया ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) तैयार किया है, जो न केवल टिकट बुकिंग की रफ्तार बढ़ाएगा बल्कि दलालों और धोखाधड़ी पर भी लगाम कसेगा। इस नई तकनीक के अगस्त 2026 तक पूरी तरह से लागू होने की संभावना है, लेकिन इसकी शुरुआत अगले महीने से ही हो सकती है।

नए सिस्टम की बड़ी बातें: वर्तमान में रेलवे की क्षमता प्रति मिनट 25,000 टिकट बुक करने की है, जिसे बढ़ाकर अब 1,25,000 टिकट प्रति मिनट किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा उन यात्रियों को होगा जो त्योहारों के समय या तत्काल कोटा में टिकट बुक करने के लिए संघर्ष करते हैं। नया सॉफ्टवेयर इतना एडवांस होगा कि टिकट बुक करते समय होने वाली देरी और वेबसाइट क्रैश की समस्या खत्म हो जाएगी। साथ ही, रेलवे का लक्ष्य वेटिंग लिस्ट को पूरी तरह खत्म कर हर यात्री को कन्फर्म सीट उपलब्ध कराना है।

धोखाधड़ी पर लगाम: अक्सर शिकायतें आती हैं कि वास्तविक यात्रियों से पहले दलाल अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए टिकट बुक कर लेते हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, नए सिस्टम में सुरक्षा की ऐसी परतें होंगी जिन्हें भेदना जालसाजों के लिए नामुमकिन होगा। बहुभाषी इंटरफेस (Multiple Languages) के कारण अब यात्री अपनी भाषा में आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे। जून तक यह सिस्टम पूरे देश में सुचारू रूप से काम करने लगेगा, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले ढाई करोड़ लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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