वोटों की तारीखों से पहले ही छिड़ा सियासी घमासान, मेयर बॉबी हकीम ने बीजेपी को दी खुली चुनौती!

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। एक ओर जहाँ भारत निर्वाचन आयोग दिल्ली में दोपहर ४ बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा करने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने एक बड़ा राजनीतिक धमाका कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जैसे ही तारीखों का पिटारा खोलेंगे, राज्य में चुनावी बिगुल पूरी तरह से बज जाएगा।

कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए फिरहाद हकीम ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव की तारीखों से नहीं डरती क्योंकि उनका संगठन साल भर जनता के बीच रहता है। भाजपा को चुनौती देते हुए मेयर ने कहा, “बीजेपी अगर बंगाल में २० सीटें भी जीत लेती है, तो उन्हें उसी में खुश हो जाना चाहिए। जनता हमारे साथ है और हमें पता है कि नतीजों में क्या होने वाला है।” हकीम का यह बयान भाजपा की उन उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है, जिसमें वे राज्य में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की २९४ सीटों पर चुनाव अप्रैल के महीने में कई चरणों में कराए जा सकते हैं। हालांकि २०२१ की तरह आठ चरणों में मतदान होने की संभावना कम है, लेकिन सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए चरणों की संख्या तय की जाएगी। हकीम ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि “हम केवल चुनाव के समय सक्रिय नहीं होते, हमारा संपर्क जनता से ३६५ दिन रहता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने २०२१ में २१३ सीटें जीतकर इतिहास रचा था और इस बार भी हम चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही पूरे राज्य में ‘आदर्श चुनाव आचार संहिता’ लागू हो जाएगी। बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी मतदान की तारीखें सामने आएंगी। चर्चा है कि बंगाल में कम से कम तीन से पांच चरणों में मतदान हो सकता है। वोटों की गिनती और नतीजों का ऐलान मई के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है। फिरहाद हकीम के इस ताजा बयान ने राज्य के सियासी समीकरणों को और अधिक गरमा दिया है, और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सचमुच भाजपा दहाई के आंकड़े के लिए संघर्ष करेगी या कोई बड़ा उलटफेर होगा।

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