मात्र २५ रुपये में भरपेट खाना! गैस संकट के बीच भी नहीं थमा जादवपुर की ‘श्रमजीवी कैंटीन’ का चूल्हा

साल २०२० में जब कोरोना महामारी ने दुनिया को घरों में कैद कर दिया था, तब कोलकाता के जादवपुर में गरीबों का पेट भरने के लिए ‘श्रमजीवी कैंटीन’ (Shromojibi Canteen) की शुरुआत हुई थी। आज ६ साल बाद, यह कैंटीन एक नए वैश्विक संकट का सामना कर रही है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने ईंधन गैस (LPG) की भारी किल्लत पैदा कर दी है। लेकिन, सीपीएम कार्यकर्ताओं का जज्बा आज भी अडिग है।

जादवपुर की इस कैंटीन में आज भी रिक्शा चालक, दिहाड़ी मजदूर और छोटे दुकानदारों को मात्र २५ रुपये में दाल, चावल, सब्जी और मछली या अंडा परोसा जाता है। इस सेवा को जारी रखने के लिए हर महीने करीब १.५ लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है। वर्तमान में गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल और उनकी कमी ने इस नेक काम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कैंटीन चलाने के लिए रोजाना कम से कम डेढ़ सिलेंडर की जरूरत होती है।

कैंटीन के संस्थापक और सीपीएम नेता सुदीप सेनगुप्ता का कहना है कि यह कैंटीन संघर्ष की उपज है और संघर्ष से ही चलेगी। गैस की कमी को देखते हुए उन्होंने आम लोगों से मदद की अपील की है। कई परिवारों ने अपने कोटे के सिलेंडर दान करने का भरोसा दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि दुनिया में युद्ध चाहे किसी के भी बीच हो, मेहनत करने वाले गरीब की थाली कभी खाली नहीं रहनी चाहिए।

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