दो अधिकारियों को नहीं छोड़ेगा नवान्न! राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल विवाद पर केंद्र और बंगाल सरकार में सीधी जंग

पश्चिम बंगाल में चुनाव की आहट के बीच केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चा खुल गया है। सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त सी सुधाकर और दार्जिलिंग के तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष मिश्रा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर भेजने की गृह मंत्रालय की मांग को नवान्न (राज्य सचिवालय) ने सिरे से खारिज कर दिया है। नवान्न ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया है कि इन दोनों अधिकारियों को दिल्ली नहीं भेजा जाएगा।
विवाद की जड़: यह पूरा मामला 7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान हुए ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ से जुड़ा है। आरोप है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के नियमों (Blue Book) का सही से पालन नहीं किया गया। राष्ट्रपति ने खुद कार्यक्रम स्थल में बदलाव और राज्य के मंत्रियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद ही केंद्र ने इन दोनों अधिकारियों को तीन दिनों के भीतर दिल्ली रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था।
राज्य का रुख: ममता बनर्जी सरकार ने शुरू से ही सुरक्षा में चूक के आरोपों को खारिज किया है। राज्य का कहना है कि राष्ट्रपति की अगवानी के लिए सिलीगुड़ी के मेयर और जिलाधिकारी मौजूद थे। मनीष मिश्रा को पहले ही दार्जिलिंग के डीएम पद से हटाकर गृह विभाग में विशेष सचिव नियुक्त किया जा चुका है, लेकिन राज्य उन्हें दिल्ली भेजने के पक्ष में नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब बंगाल कैडर के अधिकारियों को लेकर केंद्र और राज्य में ठन गई हो। चुनाव से ठीक पहले इस विवाद ने बंगाल की राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है।