मिडल ईस्ट की जंग, भारत में हाहाकार! सिर्फ 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने निकाले 52,704 करोड़ रुपये

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। मार्च के पहले दो हफ्तों में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से 52,704 करोड़ रुपये (लगभग 5.73 बिलियन डॉलर) की भारी-भरकम राशि निकाल ली है। यह पिछले 13 महीनों में विदेशी निवेश के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

गिरावट के मुख्य कारण: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारत के कॉर्पोरेट मुनाफे पर संकट मंडराने लगा है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरती कीमत (जो 92 रुपये के करीब पहुंच गई है) और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों को डरा दिया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के मुताबिक, भारत के मुकाबले दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन जैसे बाजार फिलहाल अधिक आकर्षक और सस्ते लग रहे हैं, जिससे पैसा वहां शिफ्ट हो रहा है।

IT सेक्टर पर सबसे बड़ी मार: इस बिकवाली का सबसे बुरा असर आईटी (IT) सेक्टर पर पड़ा है। ग्लोबल टेक स्पेंडिंग में कमी और अनिश्चितता के चलते इस सेक्टर से लगभग 74,700 करोड़ रुपये बाहर निकल चुके हैं। इसके अलावा पावर और हेल्थकेयर सेक्टर में भी बड़ी बिकवाली देखी गई है।

क्या और गिरेगा बाजार? NSDL के आंकड़ों के अनुसार, अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालने का यह आंकड़ा 70,000 करोड़ रुपये के पार जा सकता है। इससे पहले जनवरी 2025 में 78,000 करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली हुई थी। फिलहाल बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति है और छोटे निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

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