बंगाल चुनाव टालने की मांग! 45 लाख वोटरों का नाम अधर में, हाईकोर्ट पहुंचे ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही कानूनी जंग शुरू हो गई है। आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका तर्क है कि राज्य में ‘विशेष सुधार’ (SIR) प्रक्रिया अभी भी अधूरी है और लाखों मतदाताओं के नाम अभी भी सत्यापन (Adjudication) के चरण में हैं। ऐसे में चुनाव कराना असंवैधानिक है।
गंभीर आरोप: नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि सुजापुर और भगवानगोला जैसे मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जानबूझकर लंबित रखे गए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 60 लाख लोगों का भाग्य अभी भी अधर में है। विधायक ने अदालत से मांग की है कि या तो चुनाव की तारीखें आगे बढ़ाई जाएं या मौजूदा अधिसूचना को रद्द किया जाए। साथ ही, उन्होंने आयोग से प्रतिदिन नाम जुड़ने और कटने की सूची सार्वजनिक करने की भी अपील की है। राज्य की 294 सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, लेकिन इस कानूनी याचिका ने चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है।