“नदी में ज्वार हो तो सब अच्छा लगता है, भाटे में नाव अटक जाती है”, सेलिब्रिटी उम्मीदवारों पर दिलीप घोष का बड़ा प्रहार

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल भाजपा के ‘दबंग’ नेता दिलीप घोष एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहे हैं। शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के दौरान मंच पर दिलीप घोष की उपस्थिति और उनकी बॉडी लैंग्वेज ने साफ कर दिया कि पार्टी उन्हें फिर से मुख्य भूमिका में ले आई है। खड़गपुर से अपनी उम्मीदवारी तय होने के बाद, न्यूज़18 नेटवर्क के एडिटर ईस्ट बिस्व मजुमदार को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कई कड़े बयान दिए।

सितारों से दूरी और रवि बाबू का उद्धरण: भाजपा की उम्मीदवार सूची में इस बार फिल्मी सितारों की गैरमौजूदगी पर दिलीप घोष ने कहा, “जब टीम जीतती है, तो हर कोई श्रेय लेना चाहता है। रबिंद्रनाथ टैगोर ने कहा था—रथ सोचता है मैं भगवान हूँ, रास्ता सोचता है मैं, मूर्ति सोचती है मैं, लेकिन अंतर्यामी सब देख रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ज्वार के समय सब अच्छा लगता था, लेकिन अब जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं पर ही पार्टी भरोसा कर रही है।

जनसभा और चुनावी गणित: क्या ब्रिगेड की भीड़ जीत की गारंटी है? इस पर दिलीप घोष ने कहा, “जनसभा केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम है, जीत का सूचक नहीं। ज्योति बसु और राजीव गांधी की सभाओं में भी लाखों की भीड़ होती थी। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले सीपीआईएम ने भी ब्रिगेड भरा था, लेकिन परिणाम शून्य रहा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव मैदान की लड़ाई और सभा की भीड़ दो अलग चीजें हैं।

आरजी कर कांड और बदलाव की लहर: राज्य की कानून व्यवस्था और आरजी कर कांड पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में जो हुआ उसने लोगों के दिलों में गहरा दर्द पैदा किया है। भारतीय स्वभाव से क्रांतिकारी नहीं होते, लेकिन आरजी कर कांड के बाद न्यूटाउन में रात 1 बजे 20 हजार लोगों का उमड़ना इस बात का सबूत है कि लोग बदलाव चाहते हैं और बस सही मौके का इंतजार कर रहे हैं।”

गैस की कीमतों और वैश्विक संकट पर उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि धर्मतला के बजाय संयुक्त राष्ट्र (UN) के सामने विरोध प्रदर्शन करें। दिलीप घोष के तेवर बता रहे हैं कि 2026 की चुनावी जंग में वह भाजपा के सबसे आक्रामक योद्धा बनने वाले हैं।

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