पार्थ-माणिक ही नहीं, इन बड़े चेहरों पर भी गिरी गाज! TMC की नई रणनीति ने विरोधियों के उड़ाए होश।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बहुप्रतीक्षित उम्मीदवार सूची जारी होते ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। ममता बनर्जी ने इस बार ‘परिवर्तन के अंदर परिवर्तन’ का नारा देते हुए करीब 74 मौजूदा विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस लिस्ट में न केवल कई दिग्गज मंत्री शामिल हैं, बल्कि ग्लैमर जगत से राजनीति में आए बड़े चेहरों को भी बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को कम करने और संगठन को भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त करने के लिए ममता-अभिषेक की जोड़ी ने यह कड़ा कदम उठाया है।
इस बार की सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम खेल और मनोरंजन जगत से जुड़े विधायकों का है। क्रिकेटर से नेता बने मनोज तिवारी और मशहूर अभिनेता कंचन मल्लिक को इस बार मौका नहीं दिया गया है। वहीं, बारासात के दिग्गज नेता और अभिनेता चिरंजीत चक्रवर्ती का नाम भी गायब है। केवल इतना ही नहीं, पार्टी ने पुराने और अनुभवी चेहरों को हटाकर युवाओं पर दांव लगाया है। तपन दासगुप्ता, निर्मल घोष, असित मजूमदार, मनोरंजन ब्यापारी और विवेक गुप्ता जैसे कद्दावर नेताओं को भी इस बार चुनावी मैदान से दूर रखा गया है। पानीहाटी के विधायक निर्मल घोष को भले ही टिकट न मिला हो, लेकिन उनके बेटे को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने पारिवारिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
टिकट कटने वालों में राज्य मंत्री ज्योत्सना मंडी और तजमूल हुसैन जैसे नाम भी शामिल हैं। वहीं, भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और माणिक भट्टाचार्य को पार्टी ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। रत्ना दे नाग, सुप्ति पांडे और एंन्टाली के दिग्गज स्वर्ण कमल साहा को भी जगह नहीं मिली है। अब्दुल करीम चौधरी और सौमेन महापात्र जैसे वरिष्ठ नेताओं का बाहर होना इस बात का संकेत है कि टीएमसी अब एक नई और ऊर्जावान टीम के साथ मैदान में उतरना चाहती है। अब देखना यह है कि ७४ विधायकों को हटाने का यह बड़ा रिस्क टीएमसी के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित होता है या फिर भीतरघात की चुनौती खड़ी करता है।