ईरान के खिलाफ अकेले पड़ा अमेरिका? ट्रम्प ने नाटो (NATO) देशों को सुनाई खरी-खोटी, युद्ध के बीच बड़ी दरार

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। युद्ध के 14वें दिन अमेरिका ने ईरान की मुख्य भूमि पर एक बड़ा हमला बोलते हुए हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित उसके रणनीतिक मिसाइल अड्डों को निशाना बनाया है। बुधवार तड़के अमेरिकी वायुसेना ने 2,200 किलोग्राम (5,000 पाउंड) वजनी ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल कर ईरान के उन भूमिगत ठिकानों को तबाह कर दिया, जहाँ से एंटी-शिप मिसाइलें दागी जानी थीं। पेंटागन का दावा है कि ये मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन गई थीं।
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हमले की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि ये अभियान पूरी तरह सफल रहा और ईरान के तटीय क्षेत्रों में स्थित कंक्रीट के मजबूत मिसाइल लॉन्च पैड्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। वॉशिंगटन ने इस हमले को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, इस हमले के कुछ घंटों पहले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मचा दी। ट्रम्प ने कहा कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के अधिकांश देश इस युद्ध में अमेरिका का साथ देने से कतरा रहे हैं।
ट्रम्प ने नाटो सहयोगियों की चुप्पी और निष्क्रियता पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे एक “भयानक और मूर्खतापूर्ण गलती” करार दिया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “हर कोई व्यक्तिगत रूप से हमारे रुख से सहमत है, लेकिन कोई भी सीधे मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है।” ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अमेरिका अपने सहयोगियों के इस दोहरे रवैये को याद रखेगा। फिलहाल, इस हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं। ईरान की ओर से किसी भी समय जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।