“घबराने की जरूरत नहीं, तेल का भंडार है सुरक्षित”— घरेलू गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए मोदी सरकार ने कसी कमर

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष का असर अब भारत की ईंधन व्यवस्था पर पड़ना शुरू हो गया है। हॉरमुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए गतिरोध और ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इस संभावित संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने अभी से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त निगरानी के साथ-साथ अब शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए गैस (PNG) की आपूर्ति बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम विभाग ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे शहरों में पीएनजी के नेटवर्क का तेजी से विस्तार करें। इसके साथ ही, राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सक्रिय रहने को कहा गया है ताकि गैस की जमाखोरी न हो सके। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एलपीजी का उत्पादन ३६ प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन मांग उससे भी तेज गति से बढ़ रही है। ऑनलाइन बुकिंग का आंकड़ा ९० प्रतिशत तक पहुंचने के कारण डिलीवरी सिस्टम पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
राहत की बात यह है कि कच्चे तेल से लदे दो जहाज, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’, भारत के लिए रवाना हो चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में आपूर्ति में सुधार होगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और अभी तक कहीं भी ईंधन की कमी की सूचना नहीं मिली है। प्राथमिकता के आधार पर घरों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में गैस की आपूर्ति निर्बाध रखी जाएगी, हालांकि औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोग पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। सरकार ने संदेश दिया है कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।