स्वदेशी तकनीक का दम! 2400 TR मॉड्यूल्स वाला विरूपाक्ष रडार सुखोई को देगा नई ताकत

भारतीय वायु सेना के सबसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान Su-30MKI को आधुनिक बनाने की दिशा में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘सुपर सुखोई’ प्रोजेक्ट के तहत, DRDO द्वारा विकसित स्वदेशी ‘विरूपाक्ष’ (Virupaksh) एईएसए रडार अब डिजाइन चरण से प्रोटोटाइप चरण में पहुंच गया है।
यह रडार तेजस के ‘उत्तम’ रडार का एक बड़ा और अधिक शक्तिशाली संस्करण है। इसमें गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक का उपयोग किया गया है, जो इसे पुराने रडार प्रणालियों की तुलना में अधिक दूरी तक देखने और सटीक निशाना लगाने की क्षमता देता है। इसमें लगभग 2,400 ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल लगे हैं। हाल ही में फरवरी 2026 में इसका ‘फर्स्ट लाइट’ परीक्षण किया गया। 2028 तक इसका उड़ान परीक्षण शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद 184 सुखोई विमानों को इस रडार से लैस किया जाएगा, जिससे भारत की हवाई सुरक्षा अभेद्य हो जाएगी।