हर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गुजरात पहुंची ‘जग लाड़की’! संकट के बीच भारत आया 80 हजार टन कच्चा तेल

ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच भारत के लिए ऊर्जा के मोर्चे पर एक और बड़ी कामयाबी मिली है। बुधवार को भारतीय तेल टैंकर ‘जग लाड़की’ (Jag Laadki) हर्मुज जलडमरूमध्य के खतरनाक रास्ते को पार कर सफलतापूर्वक गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह जहाज लगभग 80,800 मेट्रिक टन कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आया है। ‘शिवालिक’ और ‘नंदादेवी’ के बाद यह तीसरा बड़ा जहाज है जिसने युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकलकर भारतीय तट पर दस्तक दी है।

फुजैराह से मुंद्रा: जोखिम भरा सफर ‘जग लाड़की’ ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह बंदरगाह से अपनी यात्रा शुरू की थी। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले ईरान ने इस बंदरगाह पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। भारी तनाव और युद्ध के माहौल में रविवार को रवाना हुआ यह जहाज महज चार दिनों के भीतर बुधवार को मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया। हर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का गला कहा जाता है, वहां ईरान की कड़ी निगरानी के बावजूद भारतीय जहाजों का आना-जाना जारी रहना भारत की मजबूत विदेश नीति का प्रमाण है।

रूसी तेल का ‘मास्टरस्ट्रोक’: चीन के बदले भारत का रुख इसी बीच, एक रूसी तेल टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ (Aqua Titan) के अचानक रास्ता बदलने से वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है। यह जहाज रूस के बाल्टिक सागर से तेल लेकर चीन के रिजाहो बंदरगाह जा रहा था, लेकिन दक्षिण चीन सागर पहुंचते ही इसने अचानक अपनी दिशा बदल ली और अब यह भारत के न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह 21 मार्च तक कर्नाटक पहुंच सकता है। संकट के इस समय में रूसी तेल का भारत की ओर मुड़ना एक बड़े कूटनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।

क्या होगा कीमतों पर असर? लगातार तीन जहाजों के भारत पहुंचने से घरेलू बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति में स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने फिलहाल रूसी जहाज के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इन खेपों के आने से देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। भारत सरकार की सक्रियता ने फिलहाल देश को एक बड़े ऊर्जा संकट से बचा लिया है।

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