SIR प्रक्रिया पर हाईकोर्ट सख्त! चुनाव आयोग को 7 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश, किस आधार पर हुआ सुधार?

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने बुधवार को निर्देश दिया कि चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारी अगले सात दिनों के भीतर याचिकाकर्ता को यह जानकारी दें कि किस अधिसूचना या सर्कुलर के आधार पर राज्य भर में SIR प्रक्रिया चलाई गई है।
याचिकाकर्ता के सवाल और घुसपैठ का मुद्दा याचिकाकर्ता अर्क मैती के वकील शमीम अहमद का तर्क है कि चुनाव आयोग बिना किसी ठोस कारण के पूरे पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया चला रहा है, जो कानून के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आयोग का मानना है कि मतदाता सूची में विदेशी नागरिक या घुसपैठिये शामिल हैं, तो उनके पास इसका क्या प्रमाण है? आरटीआई (RTI) के जरिए इस प्रक्रिया का कानूनी आधार और घुसपैठियों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन आयोग ने जानकारी देने से इनकार कर दिया था।
कोर्ट का आदेश और भविष्य की कार्यवाही अदालत ने अब केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी (CPIO) को सात दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इससे पहले अपील प्राधिकरण ने भी आयोग को चेतावनी दी थी, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। वकील शमीम अहमद ने उम्मीद जताई है कि अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग स्पष्ट करेगा कि किन सूचनाओं के आधार पर वह भारतीय नागरिकों के अलावा अन्य लोगों की उपस्थिति का संदेह कर रहा है।
चुनाव से पहले सप्लीमेंट्री लिस्ट राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। SIR प्रक्रिया 4 नवंबर को शुरू हुई थी और अंतिम सूची 28 फरवरी को प्रकाशित हुई थी। हालांकि, लाखों नाम अभी भी लंबित हैं। उम्मीद है कि इस शुक्रवार या शनिवार तक सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर दी जाएगी।