ऑपरेशन के बाद सेप्टीसीमिया और दवाओं में जहर! दोषी डॉक्टर को 2 साल की सजा और जुर्माना

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 12 साल पहले हुए बहुचर्चित नसबंदी कांड में जिला सत्र न्यायालय ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुख्य आरोपी डॉक्टर आरके गुप्ता को लापरवाही के कारण 15 महिलाओं की मौत का दोषी पाया है। प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार केतारप ने दोषी डॉक्टर को दो साल के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला? 8 नवंबर 2014 को बिलासपुर के तखतपुर ब्लॉक के पेंडारी गांव में एक नसबंदी कैंप आयोजित किया गया था। जिला अस्पताल के सीनियर सर्जन डॉक्टर आरके गुप्ता ने मात्र तीन घंटे में 83 महिलाओं का ऑपरेशन कर दिया था। ऑपरेशन के तुरंत बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने लगी और सेप्टीसीमिया के कारण 15 महिलाओं की मौत हो गई।

दवाओं में मिला था चूहे का जहर जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ऑपरेशन में लापरवाही के साथ-साथ महिलाओं को दी गई ‘सिप्रोसिन’ दवा में चूहे मारने वाला जहर मिला हुआ था। हालांकि, सजा की अवधि तीन साल से कम होने के कारण कोर्ट ने दोषी डॉक्टर को जमानत दे दी है।

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