वोटर लिस्ट के दबाव ने ली सरकारी कर्मचारी की जान, मालदा में मातम; ममता बनर्जी ने दिया कानूनी मदद का भरोसा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मतदाता सूची को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। आज शाम चुनाव आयोग पहली सप्लीमेंट्री (पूरक) वोटर लिस्ट जारी करने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस सूची में लगभग २८ लाख नए नाम शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि करीब १० लाख लोगों के नाम इस लिस्ट से हटाए जा सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने की संभावना ने राजनीतिक दलों और आम जनता के बीच हड़कंप मचा दिया है।
इस चुनावी प्रक्रिया का दबाव अब जानलेवा साबित हो रहा है। मालदा जिले के चंचल इलाके में ९३ नंबर बूथ के बीएलओ (BLO) उत्पल ठोकदार की कल अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। उनके परिवार का आरोप है कि उत्पल के बूथ के ११० लोगों के नाम विचाराधीन सूची में थे, जिसके कारण वे भारी मानसिक तनाव में थे। एसआईआर (SIR) रिपोर्ट और काम के अत्यधिक बोझ को उनके परिवार ने मौत का मुख्य कारण बताया है। इस दुखद घटना ने चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने के बाद सबसे पहले जिला निर्वाचन अधिकारियों के पास भेजी जाएगी और फिर इसे बूथों पर चस्पा किया जाएगा। लिस्ट ऑनलाइन भी उपलब्ध होगी। आयोग ने यह भी बताया कि जिन लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, उनकी एक अलग सूची होगी। आगामी शुक्रवार को दूसरी सूची जारी की जाएगी और इसके बाद हर शुक्रवार को नई सप्लीमेंट्री लिस्ट आती रहेगी। इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से घोषणा की है कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उन्हें हर संभव कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।
कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। वोटर लिस्ट जारी होने के बाद किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और मालदा जैसे संवेदनशील इलाकों में राज्य पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां भेजी गई हैं। केंद्रीय बलों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। आज सुबह राज्य पुलिस के कार्यवाहक डीजी सिद्धनाथ गुप्ता ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं, दोपहर ३ बजे राष्ट्रीय चुनाव आयोग दिल्ली से वर्चुअल माध्यम के जरिए राज्य के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक करेगा। रामनवमी और चुनाव से पहले शांति बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है।