“पुलिस क्या खुद को राजा समझती है?” गुरुग्राम पुलिस पर बरसे CJI, बाल यौन शोषण मामले में कड़ी फटकार

चार साल की मासूम बच्ची के साथ यौन शोषण के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने पुलिस के रवैये को ‘असंवेदनशीलता का चरम उदाहरण’ बताया। अदालत ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि जिस तरह से बच्ची और उसके माता-पिता के साथ व्यवहार किया गया, वह अपमानजनक था।
अदालत के कड़े सवाल: सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पुलिस से सीधा सवाल किया, “पुलिस पीड़ित बच्ची के घर क्यों नहीं गई? क्या वे खुद को राजा समझते हैं?” अदालत ने यह भी पूछा कि आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के बजाय धारा 10 के तहत मामला क्यों दर्ज किया गया? बता दें कि धारा 6 में कम से कम 20 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि धारा 10 में सजा की अवधि काफी कम यानी 10 साल है।
असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा: हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने दलील दी कि बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट के आधार पर धाराएं लगाई गई थीं। हालांकि, कोर्ट ने इसे पुलिस की लापरवाही मानते हुए फटकार जारी रखी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में पुलिस का ऐसा सुस्त और गैर-जिम्मेदाराना रवैया कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।