“चुनाव आयोग ही अंतिम निर्णय लेगा!” अधिकारियों के तबादले पर कलकत्ता हाईकोर्ट में कड़ा रुख

पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी में लगे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। चुनाव आयोग के वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग किसी भी अधिकारी को स्थानांतरित कर सकता है और इसके लिए वह किसी को जवाबदेह नहीं है।
आयोग की दलीलें: आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव की घोषणा से लेकर परिणामों तक आयोग के पास अपार शक्तियां होती हैं। बाबासाहेब अंबेडकर ने भी संविधान में आयोग की स्वायत्तता पर जोर दिया था। वकील ने तर्क दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोग केंद्र और राज्य के विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर सकता है और किसी भी अधिकारी को पद से हटा या नियुक्त कर सकता है।
कल्याण बनर्जी का पलटवार: याचिकाकर्ता के वकील कल्याण बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर आयोग बिना राज्य सरकार से चर्चा किए हर दिन दर्जनों अधिकारियों का तबादला करेगा, तो राज्य का प्रशासनिक काम कैसे चलेगा? उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री अभी भी सत्ता में हैं, उनके अधिकारियों को हटाने के बाद विभागों के जरूरी कामों की जिम्मेदारी कौन लेगा?”
मामले की पृष्ठभूमि: 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को हटा दिया गया था। इसके बाद कई अन्य अधिकारियों को दूसरे राज्यों में भेज दिया गया। इसी के खिलाफ यह याचिका दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच इस मामले पर शुक्रवार सुबह दोबारा सुनवाई करेगी।