मिडल ईस्ट जंग के बीच पाकिस्तान की नई ‘चाल’! सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने दागे तीखे सवाल

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने हिस्सा लिया। सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एकजुटता को प्रदर्शित करना था, लेकिन इस महत्वपूर्ण बैठक से तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, “विपक्ष ने युद्ध की स्थिति और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर जो भी सवाल किए, हमने उन सभी का विस्तार से जवाब दिया है।” उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि संकट की इस घड़ी में अधिकांश विपक्षी दलों ने सरकार का साथ देने का भरोसा दिया है। हालांकि, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने सरकार पर तंज कसते हुए बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और मुकुल वासनिक ने बैठक में उपस्थित रहकर अपनी राय साझा की।

बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान की भूमिका को लेकर हुई। विपक्षी सांसदों ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान जिस तरह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है, उस पर भारत का क्या रुख है? विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का यह पुराना इतिहास रहा है और वह पहले भी ऐसी कोशिशें कर चुका है। भारत सरकार हर कूटनीतिक गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए है।

आम जनता के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर ईंधन आपूर्ति को लेकर आई। युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उछाल और कमी की आशंका जताई जा रही थी, जिस पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति साफ की। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की किल्लत की खबरें महज अफवाह हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर संसद में देश को आश्वस्त किया है कि भारत किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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