दुश्मन के सीने में उतरेंगी भारत की मिसाइलें! ‘इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स’ से कांपेंगे चीन और पाकिस्तान!

बदलते वैश्विक युद्ध परिदृश्य में, भारत अपनी सैन्य शक्ति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि अब युद्ध का फैसला टैंक या लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि लंबी दूरी की मिसाइलें और सटीक मारक क्षमता (Precision Strike) करेंगे। इसी रणनीति के तहत भारत ‘इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स’ (IRF) की स्थापना कर रहा है, जो केवल पारंपरिक (Non-Nuclear) हमलों के लिए समर्पित एक विशेष सैन्य शाखा होगी।

IRF का मुख्य उद्देश्य दुश्मन की सीमा के भीतर गहरे कमांड सेंटरों और सैन्य ठिकानों को तबाह करना है। आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के कारण अब महंगे लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में लंबी दूरी की क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें सबसे प्रभावी विकल्प बनकर उभरी हैं।

IRF के तरकश में शामिल घातक तीर:

  • ब्रह्मोस और क्रूज मिसाइलें: सुपरसॉनिक ब्रह्मोस (मैक 2.8) इस बल की रीढ़ होगी। डीआरडीओ अब 800 किमी और 1000 किमी की मारक क्षमता वाली स्वदेशी क्रूज मिसाइलों (ITCM) पर काम कर रहा है।
  • प्रलय और BM-04: 500 किमी तक मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल हवा में ही रास्ता बदलने में सक्षम है। वहीं, आगामी BM-04 मिसाइल 1500 किमी की दूरी से दुश्मन के एयरबेस को ध्वस्त कर देगी।
  • पिनाका रॉकेट सिस्टम: इसे अब 300-450 किमी की रेंज तक अपग्रेड किया जा रहा है, जो पलक झपकते ही दुश्मन की चौकियों को मलबे में बदल देगा।
  • प्रोजेक्ट विष्णु और हाइपरसॉनिक हथियार: भारत ‘मैक 5+’ की गति वाले हाइपरसॉनिक हथियारों का परीक्षण कर रहा है। ‘प्रोजेक्ट विष्णु’ और ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत विकसित ये हथियार किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने की ताकत रखते हैं।

चीन और पाकिस्तान की दोहरी चुनौतियों को देखते हुए, यह रॉकेट फोर्स भारत को एक ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान करेगी, जिसे भेद पाना नामुमकिन होगा।

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