कल तक जो दुश्मन था, आज उसे टिकट? आराबुल को लेकर CPIM और नौशाद सिद्दीकी में ठनी!

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वामपंथ और आईएसएफ (CPIM-ISF) गठबंधन में दरार पड़ती नजर आ रही है। विवाद की जड़ हैं भानगढ़ के कद्दावर नेता आराबुल इस्लाम। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आईएसएफ में शामिल हुए आराबुल को पार्टी ने कैनिंग पूर्व विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। आईएसएफ के इस फैसले ने सीपीआईएम नेतृत्व को नाराज कर दिया है, जिससे गठबंधन के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

सीपीआईएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने इस मुद्दे पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि आराबुल जैसे विवादित चेहरे को साथ लेकर तृणमूल के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। सलीम के शब्दों में, “हम भ्रष्टाचार, अपराधीकरण और सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ रहे हैं। जिस विचारधारा और शैली को हराने के लिए हमारा यह संघर्ष है, उसी के किसी प्रतीक को गले लगाना स्वस्थ राजनीति नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे चेहरों को स्वीकार करना राजनीतिक रूप से असंगत है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सीपीआईएम आराबुल की उम्मीदवारी स्वीकार करती है, तो पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी रोष पैदा हो सकता है। विशेष रूप से भानगढ़ में पिछले चुनावों के दौरान आईएसएफ और वाम कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों के लिए आराबुल को ही जिम्मेदार माना जाता रहा है। अब वही नेता अगर गठबंधन का हिस्सा बनते हैं, तो यह नैतिकता का सवाल खड़ा करता है। फिलहाल गेंद आईएसएफ के पाले में है; अगर वे अपना फैसला नहीं बदलते, तो बंगाल में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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