‘वामपंथ कोई रीसायकल बिन नहीं!’ अराबुल इस्लाम को लेकर मोहम्मद सलीम ने ISF को दी गठबंधन तोड़ने की चेतावनी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। पूर्व तृणमूल नेता अराबुल इस्लाम को उम्मीदवार बनाने के आईएसएफ (ISF) के फैसले ने वामदलों के साथ उनके गठबंधन को खतरे में डाल दिया है। माकपा राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने गुरुवार को कड़े शब्दों में कहा कि वे “सांप्रदायिक दंगाइयों और लुटेरों” का समर्थन नहीं करेंगे।

विवाद का कारण: एकतरफा फैसले माकपा का आरोप है कि आईएसएफ ने न केवल अराबुल, बल्कि देगंगा से मफीदुल इस्लाम जैसे पूर्व टीएमसी नेताओं को भी टिकट दिया है, जिन्होंने अतीत में वामपंथी कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए थे। इसके अलावा, बदुड़िया, अशोकनगर और आमडांगा जैसी सीटों पर बिना चर्चा किए उम्मीदवार उतारने से माकपा नेतृत्व नाराज है। सलीम ने तंज कसते हुए कहा कि राजनीति में कूड़ेदान बदलने से कोई पवित्र नहीं हो जाता।

माकपा की नई सूची और बढ़ता तनाव तनातनी के बीच, वाममोर्चा ने ७ और सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिससे उनकी कुल संख्या २४६ हो गई है। रघुनाथगंज और नकाशिपारा जैसी सीटों पर दोनों पक्षों के बीच सीधा टकराव होने की संभावना है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नौशाद सिद्दीकी अपने उम्मीदवारों को नहीं बदलते हैं, तो चुनाव से ठीक पहले यह गठबंधन पूरी तरह बिखर सकता है।

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