‘अभया की मां’ से रत्ना देबनाथ तक: ५९४ दिनों बाद हटाया चेहरा, अब इंसाफ के लिए चुनावी रण में रत्ना!

आरजी कर कांड की उस पीड़िता की मां, जिसे दुनिया अब तक ‘अभया की मां’ के नाम से जानती थी, अब अपनी असली पहचान के साथ दुनिया के सामने आ गई हैं। ५९४ दिनों के लंबे इंतजार और कानूनी बंदिशों के बाद रत्ना देबनाथ ने गुरुवार को अपना चेहरा उजागर किया। वे अब केवल एक पीड़ित मां नहीं, बल्कि पानीहाटी विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार हैं।
अदालत से मिली पहचान की अनुमति रत्ना देबनाथ ने मीडिया को बताया कि उन्होंने नाम और चेहरा सार्वजनिक करने के लिए मानवाधिकार आयोग और अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अनुमति मिलने के बाद उन्होंने कहा, “अब लड़ाई आमने-सामने होगी। मेरी बेटी को मरे डेढ़ साल से ज्यादा हो गए, लेकिन असली कातिलों को सजा नहीं मिली।” शुभेंदु अधिकारी ने भी रत्ना के इस फैसले का स्वागत किया है।
चुनावी रण और प्रतिद्वंद्वी पानीहाटी में रत्ना का मुकाबला टीएमसी के तीर्थंकर घोष और माकपा के कलतान दासगुप्ता से है। रत्ना ने सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ही परिवार ने पूरे पानीहाटी को भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है। हालांकि उन्होंने कलतान दासगुप्ता को अपने ‘बेटे जैसा’ बताया, लेकिन यह भी साफ किया कि आंदोलन के वक्त कुछ ताकतों ने राजनीति करने की कोशिश की थी। अब वे जनता के समर्थन से अपनी बेटी के लिए न्याय और इलाके की सफाई का संकल्प ले चुकी हैं।