कमर्शियल गैस पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, कोटा में २०% की भारी बढ़ोतरी, इंडस्ट्री की चांदी!

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश के औद्योगिक क्षेत्र को बड़ी मजबूती देते हुए वाणिज्यिक एलपीजी (LPG) सिलेंडर के आवंटन को वर्तमान के ५० प्रतिशत से बढ़ाकर ७० प्रतिशत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है।

मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इस अतिरिक्त २० प्रतिशत आवंटन का लाभ विशेष रूप से उन उद्योगों को मिलेगा जो श्रम-प्रधान (Labour-intensive) हैं। इसमें स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, केमिकल और प्लास्टिक जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। सरकार का मुख्य ध्यान उन ‘प्रोसेस इंडस्ट्रीज’ पर है, जहाँ उत्पादन के लिए उच्च ताप की आवश्यकता होती है और जहाँ प्राकृतिक गैस (PNG) का उपयोग संभव नहीं है।

इससे पहले २३ मार्च को सरकार ने आवंटन ५० प्रतिशत तक बढ़ाया था, जिसमें मुख्य रूप से अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक रसोई और होटलों को प्राथमिकता दी गई थी। साथ ही, प्रवासी श्रमिकों के लिए प्रतिदिन १८० (५ किलो वाले) सिलेंडर का प्रावधान भी जारी है।

राहत का सिलसिला यहीं नहीं थमा; सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में प्रति लीटर १० रुपये की कटौती की है। इस कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क ३ रुपये और डीजल पर शून्य हो गया है। हालांकि, निर्यात शुल्क और अन्य शुल्कों के माध्यम से राजस्व संतुलन बनाए रखा गया है। घरेलू तेल उत्पादकों जैसे ONGC पर कोई ‘विंडफॉल टैक्स’ नहीं लगाया गया है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह कदम न केवल औद्योगिक उत्पादन को गति देगा बल्कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी सहायक होगा।

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