“मुझे रोकने के लिए किए गए केस और धमकी!” रामनवमी का जिक्र कर दिलीप घोष ने ममता सरकार को ललकारा

लोकसभा चुनाव के करीब आते ही भाजपा के कद्दावर नेता दिलीप घोष अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में वापस आ गए हैं। खड़गपुर सदर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस और पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। दिलीप घोष ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की घटनाओं को याद करते हुए एक बड़ा दावा किया है, जिससे बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।
दिलीप घोष ने कहा, “2021 के चुनाव से पहले जब हमने रामनवमी का जुलूस निकालने की कोशिश की, तो टीएमसी और उनके इशारे पर काम करने वाले प्रशासन ने मुझे रोकने की पूरी कोशिश की। मुझ पर कई झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और धमकियां दी गईं ताकि मैं पीछे हट जाऊं। लेकिन मैं झुका नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में हिंदुओं के त्योहारों और धार्मिक रैलियों को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में दिलीप घोष को काफी गुस्से में और आत्मविश्वास से भरा हुआ देखा जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले रामनवमी और धार्मिक पहचान का मुद्दा उठाकर दिलीप घोष खड़गपुर में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि दिलीप घोष हार के डर से सांप्रदायिक कार्ड खेल रहे हैं। बंगाल की राजनीति में अब रामनवमी का यह मुद्दा चुनावी रणभूमि को और भी गरमाने वाला साबित हो रहा है।