ममता की राह पर मोदी! 5 अप्रैल को अलीपुरद्वार से चुनावी शंखनाद करेंगे प्रधानमंत्री!

पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में अब सबसे बड़े योद्धा की एंट्री होने जा रही है। काफी दिनों से चल रहे कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा सूत्रों ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अप्रैल को बंगाल में अपनी पहली चुनावी रैली करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरह प्रधानमंत्री ने भी अपने अभियान की शुरुआत के लिए उत्तर बंगाल को ही चुना है। अलीपुरद्वार में होने वाली यह जनसभा राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
उत्तर बंगाल: भाजपा का अभेद्य किला 2019 के लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक, उत्तर बंगाल भाजपा के लिए सबसे मजबूत स्तंभ रहा है। इस बार बंगाल में मतदान दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में होना है। चूंकि पहले चरण में उत्तर बंगाल की सभी सीटों पर वोट डाले जाएंगे, इसलिए भाजपा आलाकमान ने प्रधानमंत्री की पहली रैली यहीं आयोजित करने का फैसला किया है। पार्टी को उम्मीद है कि मोदी की लहर एक बार फिर उत्तर बंगाल में विपक्ष का सूपड़ा साफ कर देगी।
12 दिनों का इंतजार और चुनावी रणनीति 14 मार्च को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में ऐतिहासिक रैली करने के बाद प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर सस्पेंस बना हुआ था। हालांकि चुनाव आयोग ने 15 मार्च को तारीखों का ऐलान कर दिया था, लेकिन मोदी की वापसी का इंतजार लंबा होता गया। बंगाल भाजपा के कुछ नेता चाहते थे कि मोदी रामनवमी के दौरान प्रचार शुरू करें, लेकिन रणनीति के तहत 5 अप्रैल की तारीख तय की गई। प्रधानमंत्री की यह रैली उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समुदायों को साधने की बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
शाह और मोदी की जुगलबंदी प्रधानमंत्री के दौरे से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शुक्रवार को बंगाल पहुंच रहे हैं। शनिवार को वह ममता सरकार के खिलाफ ‘चार्जशीट’ जारी करेंगे। शाह के हमले और फिर 5 अप्रैल को मोदी की रैली— भाजपा की यह ‘डबल इंजन’ रणनीति तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती पेश करने वाली है। अलीपुरद्वार से मोदी जो हुंकार भरेंगे, उसका असर 23 अप्रैल के पहले चरण के मतदान पर सीधा पड़ेगा।