शादीशुदा पुरुष का लिव-इन रिलेशनशिप अपराध नहीं! इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई विवाहित व्यक्ति किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे अपराध नहीं माना जा सकता। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के एक जोड़े द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की बात दोहराई है।

क्या था मामला? शाहजहांपुर की एक युवती एक विवाहित व्यक्ति के साथ लिव-इन में रह रही थी। युवती की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी व्यक्ति ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर परिवार से अलग कर दिया है। इसी एफआईआर को चुनौती देते हुए जोड़े ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

नैतिकता बनाम कानून सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि “नैतिकता और कानून दो अलग चीजें हैं।” हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि दोनों वयस्क हैं और आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं, इसलिए यह कोई कानूनी जुर्म नहीं है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि इस जोड़े को गिरफ्तार न किया जाए और युवती के परिवार को उनसे दूर रहने की चेतावनी दी।

परिवार पर पाबंदी कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि युवती के परिवार वाले न तो उनके घर जा सकते हैं और न ही किसी तीसरे माध्यम से उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्हें किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाना कानूनन गलत होगा। इस मामले की अगली सुनवाई ८ अप्रैल को तय की गई है।

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