इंदिरा गांधी की ‘वामपंथी’ राजनीति ने बढ़ाया माओवाद! लोकसभा में शाह का बड़ा प्रहार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए देश में माओवाद की जड़ें फैलने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। शाह ने कहा कि जिस वामपंथी विचारधारा का सहारा लेकर इंदिरा गांधी ने सत्ता की बिसात बिछाई थी, उसी ने देश में माओवाद के विष को फलने-फूलने का मौका दिया।
1969 के राष्ट्रपति चुनाव का जिक्र अमित शाह ने सदन में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि 1970 के आसपास (वास्तव में 1969) जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ, तब इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ वी.वी. गिरी को समर्थन दिया था। इसके लिए उन्होंने जिस वामपंथी विचारधारा और ‘अंतरात्मा की आवाज’ का सहारा लिया, उसने माओवाद को वैचारिक मजबूती दी। शाह के अनुसार, यह सोचना गलत है कि विकास की कमी से माओवाद बढ़ा; सच तो यह है कि इसे राजनीतिक खाद-पानी दिया गया।
कांग्रेस के 60 साल और ‘रेड कॉरिडोर’ गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद के 60 सालों में कांग्रेस ने आदिवासियों के हक के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक जैसे 12 राज्य ‘रेड कॉरिडोर’ में बदल गए थे। उत्तर प्रदेश के भी तीन जिले इसकी चपेट में थे। शाह ने भावुक होते हुए कहा कि माओवादी हिंसा में लगभग 21 हजार निर्दोष लोगों और सुरक्षाकर्मियों की जान गई, लेकिन कांग्रेस सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। 12 करोड़ लोग गरीबी और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर थे।
मनमोहन सिंह के बयान पर तंज अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान को भी याद दिलाया जिसमें उन्होंने माओवाद को कश्मीर से भी बड़ा खतरा बताया था। शाह ने पूछा कि जब तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस खतरे का अंदाजा था, तो उन्होंने इसके खिलाफ निर्णायक युद्ध क्यों नहीं छेड़ा? शाह ने दावा किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में आज बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास पहुँच रहा है और सुरक्षा बल माओवादियों के गढ़ में घुसकर उन्हें खत्म कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार 31 मार्च तक देश को माओवाद मुक्त करने के अपने वादे पर अडिग है।