तमिलनाडु चुनाव में ‘जेन-जी’ वोटरों का दबदबा! स्टालिन का अनुभव या विजय का स्टाइल—किसे चुनेगा युवा?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव २०२६ में इस बार ‘जेन-जी’ (Gen-Z) यानी पहली बार मतदान करने वाले युवा निर्णायक भूमिका में हैं। राज्य की राजनीति अब दो ध्रुवों में बंटती दिख रही है—एक तरफ सत्ताधारी डीएमके की जनकल्याणकारी योजनाएं हैं, तो दूसरी तरफ सुपरस्टार विजय की नई पार्टी ‘टीवीके’ का आकर्षण।

कोयंबटूर और पश्चिमी तमिलनाडु के कई युवा मतदाताओं का मानना है कि अब राजनीति में ‘नए चेहरे’ की जरूरत है। उनके लिए विजय एक उम्मीद की किरण हैं जो अपराध मुक्त समाज और महिला सुरक्षा का वादा कर रहे हैं। हालांकि, चेन्नई जैसे शहरी इलाकों के शिक्षित युवा विचारधारा को लेकर अधिक सतर्क हैं। उनका मानना है कि सिर्फ प्रशंसकों की भीड़ से सरकार नहीं चलती, ठोस राजनीतिक विजन जरूरी है। युवाओं का एक बड़ा वर्ग सरकारी योजनाओं का लाभ तो ले रहा है, लेकिन उनका असली मुद्दा ‘बेरोजगारी’ है। उनका साफ कहना है कि जो सरकार नौकरी देगी, वोट उसी को जाएगा। क्या विजय का ग्लैमर स्टालिन के गढ़ में सेंध लगा पाएगा? यह अब इन युवाओं के हाथ में है।

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