बंगाल में चुनाव से पहले ‘इमरजेंसी’ जैसे हालात! अवैध जमावड़े पर पूर्ण प्रतिबंध, नियम तोड़ा तो सीधे जेल!

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की वोटिंग शुरू होने में अभी २० दिन बाकी हैं, लेकिन राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आ रही हिंसा और विरोध की खबरों ने दिल्ली तक हलचल मचा दी है। कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर के बाहर हुए अभूतपूर्व हंगामे और मालदा के कालियाचक में सात जजों को बंधक बनाने की घटना के बाद चुनाव आयोग ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को आयोग ने पूरे राज्य में किसी भी तरह के अवैध जमावड़े पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

बिना अनुमति सभा की तो गिरफ्तारी तय चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, अब राज्य में बिना पूर्व अनुमति के कोई भी रैली, सभा या जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। यदि कोई भी इस आदेश का उल्लंघन करता पाया गया, तो पुलिस को उसे तुरंत गिरफ्तार करने के आदेश दिए गए हैं। यहां तक कि अब चुनाव आयोग के दफ्तर जाने के लिए भी पहले से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

सरकारी कर्मचारियों को सीधी चेतावनी बीएलओ (BLO) रक्षा कमेटी मंच के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को भी आयोग ने अंतिम चेतावनी दी है। सूत्रों के मुताबिक, यदि कर्मचारी फिर से मंच बनाकर विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें बिना किसी देरी के सस्पेंशन लेटर (निलंबन पत्र) थमा दिया जाएगा। पिछले मंगलवार को फॉर्म-६ को लेकर हुए हंगामे के बाद आयोग अब किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

NIA करेगी कालियाचक कांड की जांच मालदा में सात न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाकर रखने की घटना को आयोग ने ‘बेहद गंभीर’ माना है। इस मामले की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विफलता के लिए आयोग को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के डीजीपी से जवाब तलब किया है। चुनाव से पहले इस तरह की सख्त कार्रवाई बंगाल की राजनीति में खलबली मचा रही है।

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