दाल भिगोना क्यों है जरूरी? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया प्रोटीन बचाने का सबसे सही तरीका

प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए दाल भारतीय भोजन का सबसे अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से पकाई गई दाल आपके शरीर को पोषण देने के बजाय नुकसान पहुँचा सकती है? ज्यादातर लोग दाल को सीधे धोकर कुकर में चढ़ा देते हैं, जिससे उसमें मौजूद फाइटिक एसिड और टैनिन शरीर में आयरन और जिंक को सोखने नहीं देते। विशेषज्ञों के अनुसार, दाल को पकाने से पहले कम से कम ३० मिनट से १ घंटे तक भिगोना अनिवार्य है।

दाल पकाते समय अक्सर होने वाली ५ बड़ी गलतियां: १. दाल न भिगोना: सीधे सूखी दाल पकाने से वह भारी हो जाती है और पाचन में समस्या पैदा करती है। भिगोने से इसके पोषक तत्व सक्रिय हो जाते हैं। २. भिगोया हुआ पानी फेंकना: दाल जिस पानी में भिगोई जाती है, उसमें कई विटामिन घुल जाते हैं। उस पानी को फेंकने का मतलब है पोषण को बर्बाद करना। ३. शुरुआत में नमक डालना: पकने से पहले नमक डालने से दाल गलने में समय लेती है और प्रोटीन की संरचना टूट जाती है। नमक हमेशा दाल गलने के बाद डालें। ४. जरूरत से ज्यादा पकाना: दाल को हलवे की तरह गला देना गलत है। इससे फाइबर और विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स नष्ट हो जाते हैं। कुकर में २-३ सीटी ही पर्याप्त हैं। ५. मसालों का गलत तड़का: ज्यादा तेल-मसाले दाल के गुणों को खत्म कर देते हैं। बेहतर पाचन के लिए हींग, जीरा और अदरक का तड़का सबसे उत्तम है।

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