ट्रंप की ‘पत्थर युग’ वाली धमकी के बाद रूस सतर्क, क्या ईरान को अकेला छोड़ रहे हैं पुतिन?

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस एक अस्थायी युद्धविराम की मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, रूस का यह कदम शांति बहाली के लिए नहीं, बल्कि ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Bushehr Nuclear Power Plant) में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वहां करीब ४०० से ७०० रूसी कर्मचारी काम कर रहे थे, जिनमें से कई को पहले ही निकाला जा चुका है। अब बाकी बचे २०० लोगों को निकालने के लिए रूस ने अमेरिका और इजरायल से ‘सेफ पैसेज’ की मांग की है।
रूसी परमाणु एजेंसी ‘रोसाटॉम’ के प्रमुख एलेक्सी लिखाचेव ने कहा है कि रूस अपने काफिले के निकलने के रास्ते और समय की जानकारी अमेरिका व इजरायल को देगा। उन्होंने दोनों देशों से अपील की है कि जब तक रूसी नागरिकों का काफिला सुरक्षित निकल न जाए, तब तक वे किसी भी तरह के हमले न करें। यह रेस्क्यू ऑपरेशन अगले हफ्ते के लिए निर्धारित है। रूस ने ही बुशहर में ईरान का परमाणु रिएक्टर बनाया है और वहां अतिरिक्त यूनिट्स पर काम चल रहा था।
जानकारों का मानना है कि रूस की यह जल्दबाजी इस बात का संकेत है कि ईरान पर बहुत बड़ा हमला होने वाला है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों द्वारा ईरान को ‘पत्थर युग’ में भेजने की धमकी के बाद, रूस अपने विशेषज्ञों की जान जोखिम में नहीं डालना चाहता। मॉस्को की यह कूटनीतिक सक्रियता स्पष्ट करती है कि ईरान पर इजरायली और अमेरिकी मिसाइलों की बारिश अब किसी भी वक्त शुरू हो सकती है।