समंदर के नीचे भारत की ‘परमाणु सुनामी’! नौसेना में शामिल हुआ INS अरिधमन, पाकिस्तान-चीन की उड़ी नींद

भारतीय नौसेना की ताकत में आज एक ऐतिहासिक इजाफा हुआ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक सांकेतिक पोस्ट के जरिए देश की तीसरी परमाणु संचालित पनडुब्बी (Nuclear-powered submarine) ‘आईएनएस अरिधमन’ (INS Aridhaman) के नौसेना में शामिल होने के संकेत दिए। उन्होंने लिखा, “यह केवल एक शब्द नहीं है, यह शक्ति का प्रतीक है! अरिधमन।” सूत्रों के मुताबिक, विशाखापत्तनम में आयोजित एक समारोह में रक्षा मंत्री ने इसे आधिकारिक तौर पर नौसेना को सौंपा। इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक से निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट ‘आईएनएस तारागिरी’ (INS Taragiri) को भी आज कमीशन किया जा रहा है।
कितना घातक है अरिधमन? पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित आईएनएस अरिधमन भारत के गुप्त परमाणु पनडुब्बी प्रोजेक्ट का तीसरा हिस्सा है। 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी अपने पूर्ववर्तियों (अरिहंत और अरिघात) की तुलना में आकार में बड़ी और रडार को चकमा देने में अधिक सक्षम है। इसमें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित 83 मेगावाट का अपग्रेड प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर लगा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें ‘अरिहंत’ के मुकाबले दोगुनी मारक क्षमता है। यह 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूबों से लैस है, जो 3,500 किमी रेंज वाली 8 के-4 (K-4) मिसाइलें या 750 किमी रेंज वाली 24 के-15 (K-15) मिसाइलें दागने में सक्षम है।
भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ ताकत: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘अरिधमन’ भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता को सुनिश्चित करेगा। यानी अगर दुश्मन देश भारत के जमीनी ठिकानों पर परमाणु हमला करता है, तो समुद्र की गहराइयों में मौजूद यह पनडुब्बी दुश्मन के शहरों और सैन्य अड्डों को मिनटों में खाक कर सकती है। वहीं, ‘आईएनएस तारागिरी’ अपनी रडार-ईवेडिंग तकनीक और सुपरसोनिक मिसाइलों के साथ समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई देगी। इन दो नई ताकतों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की संप्रभुता और सैन्य बढ़त अब निर्विवाद हो गई है।