DA पर ममता सरकार की बढ़ी मुश्किलें! एरियर मिलते ही भड़के कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी भारी विसंगति

पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर चल रहा घमासान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने बकाया डीए का भुगतान तो शुरू कर दिया है, लेकिन गणना में गड़बड़ी के आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया है। कर्मचारियों का दावा है कि उनके पास जो मैसेज आ रहे हैं, उनमें दिखाई गई राशि उनके वास्तविक हक से काफी कम है।

ममता सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि छठे वेतन आयोग के तहत अप्रैल से 4% अतिरिक्त डीए दिया जाएगा। हालांकि, अप्रैल का महीना शुरू होने के बावजूद सरकार ने इस पर चुप्पी साध रखी है। फरवरी में हुई इस घोषणा के दो महीने बीत जाने के बाद भी पैसा हाथ में न आने से कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को टालने के लिए ‘छल-कपट’ का सहारा ले रही है और एरियर का आधा हिस्सा भी ठीक से नहीं दे रही है।

इस गतिरोध के बीच, कर्मचारियों ने अब सीधे मुख्यमंत्री के आवास यानी कालीघाट तक मार्च करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही 4% डीए और पुराने एरियर की विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो राज्य प्रशासन ठप कर दिया जाएगा।

दूसरी ओर, नवान्न (राज्य सचिवालय) ने पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर दी है। 1 अप्रैल को जारी अधिसूचना के अनुसार, 2008 से 2015 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशन पाने वालों का बकाया अगले 180 दिनों के भीतर चुका दिया जाएगा। लेकिन सक्रिय कर्मचारियों के मन में अब भी यही सवाल है कि क्या उन्हें उनका पूरा हक कभी मिल पाएगा?

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