जमीन की हेराफेरी में फँसे तृणमूल के ‘दिग्गज’! दस्तावेजों में मिले सुराग, क्या चुनाव से पहले होगी गिरफ्तारी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के मुहाने पर खड़ी तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र से निवर्तमान विधायक और वर्तमान उम्मीदवार देबाशीष कुमार को जमीन घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर तलब किया है। पिछले सोमवार को लंबी पूछताछ के बाद, शुक्रवार को उन्हें दोबारा सॉल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स बुलाया गया। ४ दिनों के अंतराल में यह दूसरा समन है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
केंद्रीय जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, कई व्यावसायिक कंपनियों के वित्तीय लेन-देन और जमीन संबंधी अनियमितताओं की जांच के दौरान देबाशीष कुमार का नाम सामने आया है। आरोप है कि एक व्यवसायी को अवैध जमीन के मालिकाना हक को कानूनी जामा पहनाने में विधायक ने अपनी रसूख का इस्तेमाल किया था। शनिवार को दो कारोबारियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान जो दस्तावेज बरामद हुए हैं, उनमें कथित तौर पर विधायक के साथ वित्तीय संबंधों के संकेत मिले हैं।
ईडी के अधिकारी आज इस बात की जांच कर रहे हैं कि जमीन के इन सौदों में विधायक की क्या भूमिका थी और क्या इसके बदले उन्हें कोई अवैध वित्तीय लाभ मिला है। हालांकि, सीजीओ कॉम्प्लेक्स पहुँचने पर देबाशीष कुमार ने आरोपों पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। भाजपा ने इस मुद्दे पर ममता सरकार को घेरते हुए इसे ‘भ्रष्टाचार का एक और नमूना’ बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने इसे चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग और राजनीतिक साजिश करार दिया है।