“देश सेवा के नाम पर धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं,” फर्जी दस्तावेज वाले जवान को हाई कोर्ट से झटका

३७ साल पहले माध्यमिक (१०वीं) का फर्जी सर्टिफिकेट जमा कर सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कांस्टेबल की नौकरी पाने वाले संतोष सरदार को कलकत्ता हाई कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। धोखाधड़ी का पता चलने पर बीएसएफ ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था और १५ महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए जब वे हाई कोर्ट पहुंचे, तो जस्टिस अमृता सिन्हा ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अदालत की कोई सहानुभूति नहीं है।
मामले के अनुसार, संतोष १९८९ में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। जांच में पाया गया कि उत्तर २४ परगना जिले के रिकॉर्ड में उनके नाम का कोई छात्र था ही नहीं। २०२१ में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने जाली दस्तावेज बनवाए थे। अदालत ने कहा कि बीएसएफ जैसे महत्वपूर्ण बल में बिना योग्यता के फर्जीवाड़े से नौकरी करना अनुशासन और नैतिकता के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने सुनवाई में देरी का हवाला दिया, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह देरी खुद याचिकाकर्ता द्वारा विभिन्न अदालतों में केस करने के कारण हुई।