जनगणना का बदला स्वरूप: 1 अप्रैल से शुरू हुआ महाभियान, जानें सेल-एन्यूमरेशन और इसके खास नियम

भारत सरकार ने देश की 16वीं और पहली ‘डिजिटल जनगणना’ का बिगुल फूंक दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और रजिस्ट्रार जनरल के आधिकारिक ऐलान के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। कोरोना महामारी के कारण इसमें काफी देरी हुई, लेकिन अब इसे आधुनिक तकनीक के साथ उतारा गया है। यह जनगणना न केवल जनसंख्या का आंकड़ा देगी, बल्कि ‘डिजिटल इंडिया’ की बदलती तस्वीर को भी दुनिया के सामने रखेगी।
दो चरणों में होगी प्रक्रिया: डिजिटल जनगणना 2027 को मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को डेटा एकत्र करने के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा। वहीं, दूसरा और अंतिम चरण फरवरी 2027 में संचालित किया जाएगा।
सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा: इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी खासियत ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ (Self-Enumeration) है। इसके तहत नागरिक खुद डिजिटल पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकेंगे। गणना कर्मियों के घर आने से 15 दिन पहले यह पोर्टल नागरिकों के लिए खोल दिया जाएगा। जो कर्मी फील्ड में काम करेंगे, वे भी रजिस्टर के बजाय मोबाइल ऐप और टैबलेट का इस्तेमाल करेंगे। रजिस्ट्रार जनरल ने स्पष्ट किया है कि एकत्र किए गए सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रहेंगे। डिजिटल होने के कारण इस बार डेटा प्रोसेसिंग में समय कम लगेगा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी।