ट्रंप के सीजफायर ऐलान से शेयर बाजार में आई भारी तेजी निवेशकों की झोली में आए 14 लाख करोड़ रुपये

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों की दिशा बदल दी है। ईरान के साथ दो हफ्तों के संघर्षविराम (सीजफायर) की घोषणा ने निवेशकों के बीच नया उत्साह भर दिया है। इस सकारात्मक संदेश के कारण बुधवार को भारतीय बाजार खुलते ही रॉकेट की तरह ऊपर भागने लगे, जिससे महज कुछ ही मिनटों के कारोबार में निवेशकों की संपत्ति में 14 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
वैश्विक संकेतों ने बाजार को दी नई ऊर्जा
बीते कुछ समय से बाजार ट्रंप के बयानों को लेकर बहुत अधिक सक्रिय नहीं दिख रहा था, लेकिन मंगलवार रात आए सीजफायर के बयान ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए। इसका असर सबसे पहले अमेरिकी बाजारों में देखा गया, जहां प्रमुख सूचकांक लगभग 1000 अंकों तक उछल गए। इसके बाद एशियाई बाजारों में भी 5 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई। इन अंतरराष्ट्रीय संकेतों का सीधा सकारात्मक असर भारतीय दलाल स्ट्रीट पर भी पड़ा।
सेंसेक्स और निफ्टी में रिकॉर्ड बढ़त
बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी करीब 3.5 प्रतिशत तक उछल गए।
- सेंसेक्स: खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 2,600 अंकों की भारी बढ़त के साथ 77,160.60 के स्तर पर पहुंच गया।
- निफ्टी: निफ्टी 50 ने भी 3.30 प्रतिशत की तेजी दिखाते हुए 23,800 के अहम आंकड़े को पार कर लिया।
- कंपनियों का प्रदर्शन: सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में से 29 के शेयरों में जबरदस्त हरियाली देखी गई, जो बाजार में चौतरफा खरीदारी का संकेत है।
बाजार में तेजी के पीछे के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी उछाल के पीछे केवल एक बयान नहीं, बल्कि उससे जुड़ी व्यापक संभावनाएं हैं:
- भू-राजनीतिक स्थिरता: ईरान के साथ सीजफायर की खबर से मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को राहत मिलेगी।
- निवेशकों का भरोसा: युद्ध की आशंकाएं कम होने से निवेशकों का जोखिम लेने का नजरिया (Risk Appetite) बढ़ा है।
- कच्चे तेल की कीमतें: तनाव कम होने की संभावना से कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जो भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए बेहद फायदेमंद है।
संभावित प्रभाव और विश्लेषण
बाजार की इस तेजी ने साबित कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाएं आज भी आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा कारक हैं। ट्रंप के इस कदम ने न केवल अमेरिका बल्कि भारत जैसे उभरते बाजारों में भी तरलता (Liquidity) बढ़ाने का काम किया है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह तेजी केवल अल्पकालिक भावनाओं पर आधारित है या दीर्घकालिक स्थिरता की ओर इशारा कर रही है।
एक झलक में
- डोनाल्ड ट्रंप के ईरान सीजफायर बयान से बाजारों में आई भारी तेजी।
- भारतीय निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में ही 14 लाख करोड़ रुपये कमाए।
- सेंसेक्स में 2,600 और निफ्टी में 800 से अधिक अंकों का उछाल।
- अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले मजबूत वैश्विक संकेत।
- सेंसेक्स की 30 में से 29 प्रमुख कंपनियां बढ़त के साथ कारोबार कर रही हैं।